शनिवार, 28 अगस्त 2010

विभूतिनारायण अपने कैमरामैन रवीन्द्र कालिया के साथ : अश्वनी खण्डेलवाल

‘नया ज्ञानोदय’ के अगस्त अंक में विभूतिनारायण राय का साक्षात्कार पढ़ते समय दिमाग में ‘हंस’ के फरवरी 2010 के अंक में प्रकाशित अभिज्ञात की कहानी ‘मनुष्य और मत्स्यकन्या’ कौंध गयी। बाजार की मजबूरी देखिये, क्या-क्या नहीं करना पड़ता है बाजार में टिके रहने यानी लगातार ग्राफ ऊंचा करते रहने के लिए। रवीन्द्र कालिया भी इसी बाजार की कठपुतली ही तो हैं। और जानते भी हैं कि बाजार को सबसे अधिक आकर्षित करती है ‘स्त्री-देह’। तो सारा का सारा साक्षात्कार गणेश-परिक्रमा है ‘स्त्री-देह’ यानी पितृ सत्तात्मक मानसिकता की। यही बाजार की माँग भी है।

साक्षात्कार की प्रथम पंक्ति - ‘‘काफी महत्वपूर्ण सम्पादक हैं रवीन्द्र कालिया" नेबर्स एनवी, ओनर्स प्राइड की पृष्ठभूमि से उभरती है। अंक (प्रेम व ) अति महत्वपूर्ण हिन्दी साहित्य के लिए का पैमाना - ‘‘मुझे याद नहीं कि कालिया जी के सम्पादन को छोड़कर किसी पत्रिका ने ऐसा चमत्कार किया हो कि उसके आठ-आठ पुनर्मुद्रण हुए हों।’’ वही बाजार। जितनी अधिक माँग, उतना महत्वपूर्ण।

माननीय, आप दोनों की जुगल-जोड़ी यदि ‘मनोहर कहानियाँ’ या ‘सत्यकथा’ और आगे बढ़ना चाहें तो ‘इन्द्रलोक’ आदि के लिए काफी उपयुक्त रहेगी। बाजार में इनकी माँग ‘नया ज्ञानोदय’ से कई गुना अधिक है। हो गया न महत्त्व साबित !

हमारा शर्म से सिर झुक जाता है हिन्दी पाठक का ऐसे वक्तव्य-विचार जानकर हिन्दी के तथाकथित महारथियों से। वैसे पितृसत्ता के वाहक एक ‘पुलिसिये’ से स्त्री के लिए ‘छिनाल’ जैसे शब्दों की नाउम्मीदी निरी बेवकूफी ही होगी।
स्त्री-देह की मुक्ति तथा ‘स्त्री-मुक्ति’ दो अलग विषय हो सकते हैं विभूति जी के लिए।

कुलपति महोदय शायद यह स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि स्त्री पर सारी वर्जनाएँ इसकी ‘देह’ से ही शुरू होती हैं। तभी तो वे यह कहने की हिम्मत जुटा पाते हैं कि ‘‘लेखिकाओं में होड़..... मिल जाएँगे। दरअसल इससे स्त्री मुक्ति के बड़े मुद्दे पीछे चले गये हैं।’’

स्त्री को ‘छिनाल’ की उपाधि से नवाजना क्या ‘स्त्री-देह’ के बाहर की बात है या यह महत्वपूर्ण नहीं है ! आज भी तथाकथित सभ्य समाज में आए दिन पंचायतों के फरमानों पर स्त्री को निर्वस्त्र कर सड़कों पर दौड़ाना, इनके फुटेज बनाकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर दिखाना तथा इन पर लम्बी चर्चा कर अपना टीआरपी बढ़ाना तथा ‘विभूतिनारायण अपने कैमरामैन रवीन्द्र कालिया के साथ’ का चित्रण एक ही प्रकार के प्रायोजित कार्यक्रम लगते हैं।

4 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

आनन्‍द पाण्‍डेय ने कहा…

ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

आप भी सादर आमंत्रित हैं,
http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
प्रसार में अपना योगदान दें ।
यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

धन्‍यवाद

Surendra Singh Bhamboo ने कहा…

ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया
लक्ष्य

हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

डॉ.अभिज्ञात ने कहा…

प्रसंगवश अपनी कहानी 'मनुष्य और मत्स्यकन्या' की चर्चा यहां देखकर सुखद विस्मय हुआ। शुक्रिया..